संत्रास आज आसमाँ भी हुई तेरे क़तरे से लाल, कहीं ये रंग लिख़ ना जाएँ इस देश का भावी हाल। बारूद के धुएं में अब सांस लेना हैं मुश्किल, रखवाला ही बन रहा हैं इस धर्ती का क़ातिल। येह ज़मीं हैं तेरी भी फ़िर काहें का रेष, चंद लम्हों की ज़िन्दगी जीले बिन द्वेष। – अंकुर… Read More