कभी फिर मिलेंगे

चलो, कभी फिर मिलेंगे।किसी और ज़िंदगी,किसी और दुनिया में। जहाँ मेरी गुस्ताखियाँ कम हों,जहाँ मेरी नादानियाँ कम हों। जहाँ शायद मैं हो पाऊं थोड़ा और ज़िम्मेदार,जहाँ शायद मैं ले पाऊं इन कंधों पे और थोड़ी भार। जहाँ दोस्ती में कोई शर्त न रखी जाए,जहाँ सच्चा प्यार मिल पाए। जहाँ दिल में थोड़ी कम हो खटास,जहाँ…

मुस्कान

सुनो, मुझे हँसना सिखा दो।कैसी होती है मुस्कान, बस वो बता दो। बचपन में खिलखिलाते, कुछ आवाज़ें गुम गईं,जवानी के ठहाके, लोगों के कानों में चुभ गईं। किसी बात पे खुश हुए और काम बिगड़ गया,तो डर से उनपे भी खुश होना छोड़ दिया। अब तस्वीरें खिचवाना अजीब लगता है,खुद का चेहरा भी अजनबी सा…

Frozen Gaze

I may look cold as ice,When I see in them nothing nice.With a gaze that could freeze,And a heart that’s hard to please. You may find me rude,But on good days, I’m the next-door dude.A familiar face with hidden grace,Waiting for a smile to light up this space. Behind the frost, there’s warmth untold,A story…

प्याज़ की परतें

प्याज़ की परतों की तरह जब रिश्तों की परतें खुलती हैं,अपने साथ भावनाओं की बरसात लेकर आती हैं। वक़्त की छूरी धीरे धीरे उन परतों को अलग अलग आकारों में काटती है,आकार निर्भर करता है की आज किस मनोदशा का व्यंजन बन्ना हैं। प्यार की आंच में अगर उसे धीमे धीमे पकाया जाये,तो उसका स्वाद…

ভালোবাসার প্রশ্ন

একটা প্রশ্ন অনেক আঘাত করে আমার মনে,তুমি কি আজও আমায় ওম্নি চাও অন্তরণে। দিন গুনে অনেক বছর পেরোলো,আমার ভালোবাসার পেখম গজালো। যায় যেখানে চোখ শুধু তোমাকেই দেখতে চায়,জানিনা এই মন এতো ভালবাহা কোথায় পায়। জীবনের কৌতূহলে প্রেম কি কমে যায়?পথ ভোলা পথিকের মতো অন্ধকারে যদি রাস্তা খুঁজে না পায়?

व्याकुलता

एक अजब सी कशमकश है मेरे दिल में आज,एक नई शुरुआत कि की है आगाज़। दिमाग कहे ज़्यादा ना सोच,पर दिल है बेचैन देख मौसम का शोर। वैसे तो बारिश हैं शुभ संदेश लाती,पर व्याकुल मन को है चिंता सताती। चाहु वो जो हो सबके लिए अच्छा,पर डरता है मन और उसमें बसा बच्चा। बस…

कुछ आज़ादी अब भी बाकी है

यह आज़ादी बड़ी महंगी पड़ी है,सही मायनों में ये लड़ाई अब भी जारी है। किसी का आँगन छूटा,कहीं छूटा माँ का आँचल। किसी का दामन छूटा,कहीं टूटा सपनों का बंधन। परछाई अब अधेरों से निकल रही है,सही मायनों में ये लड़ाई अब भी जारी है। किसी का हाथ थाम लूँ गर्व से फेरे,कोई प्यार से…

तेरा बरामदा

आज भी जब उस राह गुज़रता हूँ,नज़रें एक टक उस बरामदे पर चली जाती हैं. खुद को झूठ ना बोल पाऊंगा,हाँ, देखते ही यादेँ ताज़ा हो जाती हैं. तू नहीं, पर तेरा एहसास आज भी है वहां,इक भ्रम सी परछाई आज भी दिख जाती है. उस कमरे की तस्वीर आज भी ज़हन में हैं छपी,वह…