चलो, कभी फिर मिलेंगे।किसी और ज़िंदगी,किसी और दुनिया में। जहाँ मेरी गुस्ताखियाँ कम हों,जहाँ मेरी नादानियाँ कम हों। जहाँ शायद मैं हो पाऊं थोड़ा और ज़िम्मेदार,जहाँ शायद मैं ले पाऊं इन कंधों पे और थोड़ी भार। जहाँ दोस्ती में कोई शर्त न रखी जाए,जहाँ सच्चा प्यार मिल पाए। जहाँ दिल में थोड़ी कम हो खटास,जहाँ…
