आज भी जब उस राह गुज़रता हूँ,नज़रें एक टक उस बरामदे पर चली जाती हैं. खुद को झूठ ना बोल पाऊंगा,हाँ, देखते ही यादेँ ताज़ा हो जाती हैं. तू नहीं, पर तेरा एहसास आज भी है वहां,इक भ्रम सी परछाई आज भी दिख जाती है. उस कमरे की तस्वीर आज भी ज़हन में हैं छपी,वह…
आज भी जब उस राह गुज़रता हूँ,नज़रें एक टक उस बरामदे पर चली जाती हैं. खुद को झूठ ना बोल पाऊंगा,हाँ, देखते ही यादेँ ताज़ा हो जाती हैं. तू नहीं, पर तेरा एहसास आज भी है वहां,इक भ्रम सी परछाई आज भी दिख जाती है. उस कमरे की तस्वीर आज भी ज़हन में हैं छपी,वह…