कभी फिर मिलेंगे

चलो, कभी फिर मिलेंगे।
किसी और ज़िंदगी,
किसी और दुनिया में।

जहाँ मेरी गुस्ताखियाँ कम हों,
जहाँ मेरी नादानियाँ कम हों।

जहाँ शायद मैं हो पाऊं थोड़ा और ज़िम्मेदार,
जहाँ शायद मैं ले पाऊं इन कंधों पे और थोड़ी भार।

जहाँ दोस्ती में कोई शर्त न रखी जाए,
जहाँ सच्चा प्यार मिल पाए।

जहाँ दिल में थोड़ी कम हो खटास,
जहाँ रिश्तों में ना मांगे हो मिठास।

जहाँ गरीबी का कम हो साया,
जहाँ भावनाओं से ना बड़ी हो माया।

चलो देता हूँ इस देह को एक और मौका,
ना देना इस बार किसी को धोखा।

अलविदा दोस्तों,
चलो कभी फिर मिलेंगे,
अबके थोड़ा कसके गले लगेंगे।

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