सुनो, मुझे हँसना सिखा दो।
कैसी होती है मुस्कान, बस वो बता दो।
बचपन में खिलखिलाते, कुछ आवाज़ें गुम गईं,
जवानी के ठहाके, लोगों के कानों में चुभ गईं।
किसी बात पे खुश हुए और काम बिगड़ गया,
तो डर से उनपे भी खुश होना छोड़ दिया।
अब तस्वीरें खिचवाना अजीब लगता है,
खुद का चेहरा भी अजनबी सा लगता है।
वक़्त से डर लगने लगा है,
उसका साया चेहरे पे दिखने लगा है।
अतीत के खुशनुमा यादें सुना दो,
कोई वापस मुस्कुराना सिखा दो।

