कभी-कभी बहुत रोना आता है,
पर आँसू नहीं आते।
एक कचोट सी है दिल में,
पर बयान नहीं किये जाते।
है दुनिया खुशनुमा,
पर मैं खुश नहीं।
हूँ भीड़ में भी तन्हा,
पर उसमें भी गम नहीं।
अकेलेपन में अक्सर,
क्षण भर की ख़ुशी पा जाता,
पर मेरी परछाई को भी,
मेरा साथ रास नहीं आता।
मन की चाहत से हूँ मैं अनजान,
बस मिल जाए इस जीवन को अंजाम।
तन्हाई का साथ अब हो गया है गहरा,
अब इसी का है मेरे जीवन पर पहरा।
एक कचोट सी है दिल में,
पर बयान नहीं किये जाते।
कभी-कभी बहुत रोना आता है,
पर आँसू नहीं आते।

