प्याज़ की परतों की तरह जब रिश्तों की परतें खुलती हैं,
अपने साथ भावनाओं की बरसात लेकर आती हैं।
वक़्त की छूरी धीरे धीरे उन परतों को अलग अलग आकारों में काटती है,
आकार निर्भर करता है की आज किस मनोदशा का व्यंजन बन्ना हैं।
प्यार की आंच में अगर उसे धीमे धीमे पकाया जाये,
तो उसका स्वाद भी दुगना हो जाये।
पर उसी आंच में अगर हो क्रोध, ईर्ष्या या द्वेष;
तो वही हो सकता है उस भोजन का शेष।
परतदार बिरिस्ता जिस प्रकार बिरयानी का स्वाद बढ़ाता है,
एक ज़यादा भुना प्याज़ चोखे का स्वाद बिगाड़ता हैं।
एक झांझ वाले प्याज़ का स्वाद होता है तीखा,
पर सलाद में ना दिखे तो लगता है कुछ फीका।
चटनी के साथ कच्चा या भूनेंगे पकाएंगे,
यह प्याज़ की परतें आप किस रूप में खाएंगे।

