सुनो,
कैसे हो?
आज ऐसा लग रहा है,
कई दिन हो गए हमें बात किये हुए।
कई दिनों की तरह मेरे दाएं ओर का सिरहाना ख़ाली पढ़ा था,
उस तकिये को भी अब तुम्हारी आदत हो गयी है।
अलमारी के दरवाज़े भी हलके थे,
उन्हें भी मानो कम कपड़ों का खालीपन सता रहा है।
बाथरूम में वह ब्रश भी सूखा पढ़ा रहा हैं,
कई दिनों से उस आईने को भी तुमने भिगोया नहीं है।
येह होठ, येह बाहें, कर रही है इंतज़ार,
मेरी सुबह को भी अब तुम्हारी आदत हो गयी है।
आज मानो ऐसा लग रहा है,
कई दिन हो गए हमें बात किये हुए।
सुनो!
कैसे हो?

