व्याकुलता

एक अजब सी कशमकश है मेरे दिल में आज,
एक नई शुरुआत कि की है आगाज़।

दिमाग कहे ज़्यादा ना सोच,
पर दिल है बेचैन देख मौसम का शोर।

वैसे तो बारिश हैं शुभ संदेश लाती,
पर व्याकुल मन को है चिंता सताती।

चाहु वो जो हो सबके लिए अच्छा,
पर डरता है मन और उसमें बसा बच्चा।

बस यही चाहु हाथ जोड़ नतमस्तक,
हौले हौले जो हांकी है गाड़ी वो चलती रहे कुशल पथ।

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