यह आज़ादी बड़ी महंगी पड़ी है,
सही मायनों में ये लड़ाई अब भी जारी है।
किसी का आँगन छूटा,
कहीं छूटा माँ का आँचल।
किसी का दामन छूटा,
कहीं टूटा सपनों का बंधन।
परछाई अब अधेरों से निकल रही है,
सही मायनों में ये लड़ाई अब भी जारी है।
किसी का हाथ थाम लूँ गर्व से फेरे,
कोई प्यार से ले उपनाम मेरे।
कोई मेरी भी झोली भर दे आकर,
किलकारियों से गूंजे मेरा भी आँगन।
सपनों को हक़ीक़त में बदलने की बारी आ रही है,
सही मायनों में ये लड़ाई अब भी जारी है।
अब रिश्ता हो हमारा भी कानूनी,
आने वाले पीडियो को हैं हमारी कहानी सुनानी।
नाज़ है मुझे उनपर जिन्होंने की थी शुरुआत,
बदला कुछ कानून अतरंगी और दी प्यार की सौगात।
टुकड़ों टुकड़ों में कुछ सौगात मिली है,
मेरे पंखों को उड़ने की आस मिली है;
कुछ आज़ादी अब भी बाकी है,
सही मायनों में ये लड़ाई अब भी जारी है।

