मर चुका है,
हर आदमी अंदर से मर चुका हैं।
किसीकी मां, किसीका बाप,
किसका भाई मर चुका हैं।
सांसद में टेबल पीटते दलालों का,
जमीर मर चुका हैं।
अपने जमीन का हक मांगता,
वो किसान मर चुका हैं।
ऑक्सीजन के इंतजार में वो मरीज,
सड़क पे मर चुका हैं।
गोलियां चलाने वालो को सत्ता दी है,
देखो यह देश ही मर चुका हैं।
